July 10, 2018

Shero Shayari | Hindi Sher o Shayari | शेरो शायरी

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सरहद तुम्हें पुकारे तुम्हें आना ही होगा,
कर्ज अपनी मिट्टी का चुकाना ही होगा,
दे करके कुर्बानी अपने जिस्मो-जां की,
तुम्हे मिटना भी होगा मिटाना भी होगा।

क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत... ऐ जिंदगी,
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।

कभी बनती थी तो
कभी बिगड़ कर बैठ जाती थी,
तेरे साथ जैसी भी थी जिंदगी
जिंदगी जैसी तो थी।

तमन्ना हो मिलने की तो,
बंद आँखों मे भी नज़र आएँगे..
महसूस करने की कोशिश तो कीजिए,
दूर होते हुए भी पास नज़र आएँगे।

तुझसे दूरियां तो मिटा दूँ मैं... एक पल में मगर,
कभी कदम नहीं चलते कभी रास्ते नहीं मिलते।

सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़े है लोगों की निगाहों में।

दौड़ती भागती दुनिया का यही तोहफा है,
खूब लुटाते रहे अपनापन फिर भी लोग खफ़ा हैं।



भरोसा क्या करना गैरों पर,
जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।

तुम्हें गुमां है कि मैं जानता नहीं कुछ भी,
मुझे ख़बर है कि रस्ता बदल रहे हो तुम।

दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूँ कुछ पल ,
अजनबी राहों की तरफ कदम मोड़ता हूँ।

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं,
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं।

दीवानगी हमारी हर राज़ खोल देती है
खामोशी हमारी हर बात बोल देती है
लेकिन शिकायत है तो सिर्फ़ इस दुनिया से
जो दिल के जज़्बात भी पैसों से तोल देती है।

बिना ख्वाबों के भी कोई सो पाया है,
बिना यादों के भी कोई खो पाया है,
आप तो हमारी धड़कन हैं,
क्या दिल धड़कन से जुदा हो पाया है। 

यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएं हम,
न तमन्ना है कि किसी को रुलाएं हम,
जिसको जितना याद करते हैं,
उसे भी उतना याद आयें हम। 

क्या कहूँ मैं अपने इश्क की दास्ताँ तुझसे
हो सके, तो खुद पढ़ ले मेरे कहानी…. मेरी आँखों से।

जब कभी तेरा दिल, किसी पे आ जाए
तो बस खुदा से इतनी दुआ करना,
कि किसी बेवफा के संग तू प्यार के सपने न सजाए। 

देख कर मेरा नसीब मेरी तक़दीर रोने लगी,
लहू के अल्फाज़ देख कर तहरीर रोने लगी,
हिज्र में दीवाने की हालत कुछ ऐसी हुई,
सूरत को देख कर खुद तस्वीर रोने लगी।

न जाने क्यों उससे प्यार करता हूँ मैं,
न जाने क्यों उसपे जान निस्सार करता हूँ मैं,
यह जानता हूँ वह देगा धोखा एक दिन,
फिर भी जाने क्यों उसपे ऐतबार करता हूँ मैं।

मोहब्बत की हद्द है सितारों से आगे,
प्यार का जहाँ है बहारों से आगे,
वो दीवानों की कश्ती जब बहने लगी,
तो बहते बह गई किनारों से आगे।

कुछ रिश्तों को कभी भी नाम ना देना तुम,
इन्हें चलने दो ऐसे ही इल्जाम ना देना तुम,
ऐसे ही रहने दो तुम तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में,
कि अल्फ़ाज़ों को मेरे अंज़ाम ना देना तुम।

कुछ सोचूं तो तेरा ही खयाल आता है,
कुछ बोलूं तो तेरा ही नाम आता है,
कब तक छुपाऊं दिल की बात,
तुम्हारी हर बात पर मुझे प्यार आ जाता है।

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