May 13, 2018

3 idiots फिल्म से हमें क्या motivation मिलती है, पढिएगा जरूर

motivational story hindi

आज हम बात करेंगे की फिल्म 3 इडियटस हमें कौन सी प्रेरणा देती है। पॉजिटिव थॉट्स से मतलब केवल खुश होना ही नहीं है। पॉजिटिव थॉट्स का मतलब है लाइफ में कुछ रियल वैल्यूज क्रिएट करना और कुछ ऐसी स्किल्स क्रिएट करना जो एक स्माइल से भी ज्यादा देर टिके। केवल पॉजिटिव थिंकिंग रखने से ही इसका असर आपके काम, आपके हेल्थ यहां तक कि आपकी लाइफ पर भी दिखना शुरु होगा और आप पहले से ज्यादा खुशनुमा फील करने लगेगें। पॉजिटिव थॉट्स की शक्ति से घोर अन्धकार को भी आशा की किरणों से रौशनी में बदला जा सकता है। हमारी थॉट्स पर हमारा स्वंय का कण्ट्रोल होता है। इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें पॉजिटिव सोचना है या नेगेटिव हम सब ने अमीर ख़ान की मूवी 3 इडियट्स देखी है। वो मूवी हमे बहुत ही प्रेरित करती है की कागज की औक़ात इंसान क़ि हूनर से ज्यादा कब से हो गई।

इस फिल्म मैं हम सब देखते है क़ि अमीर ख़ान स्टडी को उतना सीरियस लेकर नहीं पढ़ते है वो रट्टा मार कर पास नहीं होते, बल्कि अपने अंदर की क्रिएटिविटी के कारण होते है। वो कहते है हम हिस्टरी बनाने के बनाने के लिय आए है और वो तभी पॉसिबल है जब हम अपने अंदर के टैलैंट को पहचान कर उसका दामन पकड़ कर आगे का सफ़र तय करेंगे। इस फिल्म के लास्ट में हम देखते है की आमिर खान जो उस कॉलेज की बेस्ट स्टूडेंट होते है और जो डिग्री उनको मिलती है वो उनकी अपनी नहीं होती है वो तो उस कॉलेज में सिर्फ ज्ञान प्राप्त करने जाते है। मूवी के अंत मै वो एक बेहतरीन वैज्ञानिक बन जाते है जबकि उनके पास कोई डिग्री नहीं होती फिर भी। जब इस फिल्म को देखने के लिय कुछ वर्कर आये तो उनसे पूछा की सर आपके पास एक भी डिग्री नहीं थी फिर भी आप लास्ट मै एक साईंटिस्ट बन जाते हो तो आमिर खान इन से पूछते है की आपको पता है ना में कौन हूँ, एक एक्टर।

परन्तु मेरे पास इसकी डिग्री नहीं है? तो भी आप मुझे कैसे बोल सकते है की मै एक एक्क्टर हूँ, तो वर्कर कहता है की वो आपके एक्क्टिंग से पता चल जाता है' तो आमिर खान कहते है की राइट मेरा काम आपको बताता है की मै एक एक्टर हूँ!एक्टिंग,आपको ये मेरी एक्टिंग बयां करती है। जैसे आप एक अच्छे कटर मैन है इसका मतलब आपके अंदर वो काबिलियतल है। इस कारण से अगर आपके पास इसकी डिग्री होती और काबिलियत नहीं होती तो उसका क्या फयादा। क्या उस टाइम हम कंट्री का विकास कर सकते नहीं क्या। इसलिए मोर इम्पोर्टेन्ट की आप के पास काबिलियत है तो हम सब को उस एजुकेशन को प्रमोट करना है जो कंट्री को विकास के और ले जाये न हे बर्बादी की और ...तो ये मूवी हमे यही प्रेरणा देते है की it does not matter की हमारे पास डिग्री है या नहीं, मेटर ये रखता है की हम में कौन सी काबिलियत है।

हम दिल से क्या करना चाहते है, किस काम को करने में हमे इंटरेस्ट आता है क्यकि अगर किसी काम को हम अपने दिल से करते है तो वो काम जरूर हो जाता है। हम सब जानते है की इस फिलम मैं आमिर खान जब भी परेशान होते थे, तो वो बोलते है आल इज वेल उसका मतलब है की दिल को पता है की कुछ अच्छा नहीं हो रहा फिर भी हम दिल को कहते है, बेटा यहाँ सब ठीक है तू टेंशन क्यों ले रहा है। ताकि हमारे मन मन में नेगटिव की जगह पॉजिटिव व्यू आने स्टार्ट हो जाएं। यहाँ स्टोरी हमे ये बताती है की मन को अपने जीवन मै अपने कार्य को पूर्ण रूप से करना चाहिए। जिस चीज में मन लगता है वो काम उसे दिल से करना चाहिए। सफलता अपने आप उसे मिलेगा और ये स्टोरी हमे ये भी बताता है की जरूरी नहीं है की जो माता पिता हमे बोलते है वही ठीक होता है। माता पिता के खुशी हमारे लिए इम्पोर्टेन्ट है परंतु जो काम करने में हमें इंटरेस्ट नहीं आ रहा है वो क्यों करें।

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