April 3, 2018

व्यक्तित्व विकास - Personality Development Tips in Hindi


Personality Development Tips in Hindi
पर्सनालिटी डेवलपमेंट की सबसे ख़ास बात जो लोगों को बताई जाती है, वो यह है की किस तरह आपको खुद को पेश करना चाहिये। मसलन अगर आप किसी से मिलने जाते है और आपको कोई बात पसंद नहीं आती है तो उस वक़्त जरुरी नहीं है की आप उसकी हर बात से सहमत रहें आप एक सहेज़ अंदाज़ में आपकी ना पसंद के बारे में बता देना चाहिये। जो है वैसा बर्ताव (बी रियल), जब भी आप किसी से बात करें तो उस बात का कोई मकसद हो, कई लोगों को सुनने की आदत नहीं होती है और यह लोगों की सबसे बड़ी खामी है अगर आप बोलना कहते है तो दूसरों की भी सुनना चाहिये। जब कोई जोक्स मरते है तो भले ही कितना आम जोक्स क्यूँ न हो आपको सबके साथ मुस्कुराना चाहिये, हसना चाहिये।

इन सभी बातों में सबसे ज्यादा जरुरी यह है की आपकी सोच सकारात्मक होने चाहिये। दुनिया में जरुरी नहीं है की सभी चीज़े आपके अनुरूप चलें, कभी कभी इस बात की निराशा हो जाती है। लेकिन सोचने की बात यह है की जो हो गया उस पर किसी का काबू नहीं है जो है और आने वाला है हम उसके बारे में सोचें और निरंतर कार्य करते रहें, और अपनी ताकत को पहचाने कि आप कहाँ अच्छे है और कहाँ आप कमज़ोर पड़ सकतें है। और ऐसी किसी भी बात या विवाद में ना पड़े जिसके बारे में आपको कोई ज्ञान ना हो।

सभी की जिन्दगी अलग अलग तरह से ढली होती है। कुछ लोगों के जीवन में परिश्रम ज्यादा होता है और कुछ लोग आसानी से चीज़े हासिल कर लेते है। लेकिन यह बात हम सबको समझने की जरुरत है की सबकी जिन्दगी अलग होती है और हर कोई उसके हिसाब से परिश्रम करता है। तो जरुरी नहीं है की जो आप सोच रखते है वही सामने वाला भी रखता हो।

कार्य उतना ही हाँथ में लेना चाहिए जितना आप कर सकें। ज्यादा कार्य लेकर, कम काम करने से ग़लतफ़हमी बढती है। इसलिए आपको यह पता होना चाहिए है की आपकी क्षमता क्या है। आपकी यह जवाबदारी हो जाती है की जो आपने वादे किए है उसे पूरा करें। कई ऑफिस में टारगेट दिए जातें है, और ऐसे समय बॉस को ना बोलना कठिन होता है। लेकिन बॉस को हाँ बोल कर काम ना करना आपकी जॉब पर खतरा पड़ सकता है। इसलिए अगर आप वो कार्य ना कर पा रहें हो तो आप अपने बॉस से इस बारे में चर्चा करें। और कार्य को सटीकता से करने का प्रयास करें।

और साथ ही ज्यादा से ज्यादा समय अपनी कार्य को दे और जब आप का कार्य ख़तम हो जाये तो फिर आप पूरा समय अपने आप को दें। क्यूंकि एक बहुत पुरानी कहावत है “आल वर्क एंड नो प्ले मेक्स जैक अ डल बॉय” जिसका मतलब यह हुआ की काम और आपकी निजी जिन्दगी दोनों ही जिन्दगी के वो पहलु है जिसके बिना गुज़ारा नहीं होता है।

➧ खुद को कैसे पेश करें?
खुद को सही तरीके से पेश करके आप अपने लिए एक सकारात्मक छवि (पाज़िटिव इमेज) कायम कर सकते हैं। आपका पहला प्रभाव ही ये बता देता है कि आप कितने गरिमामयी और बेहतरीन व्यक्तित्व के मालिक हैं।

खुद को बेहतर ढंग से पेश करने के लिए ये तरीके अपनाएं
- सही मौके पर सही कपड़े पहनें।
- अपने नाक नक्श और व्यवसाय के मुताबिक सही आकार और स्टाइल में बाल कटवाएं।
- रोज़ नहाएं।
- साफ सुथरे और इस्त्री किए हुए कपड़े पहनें।
- पॉलिश किए हुए साफ जूते पहनें। हो सके तो जूते और बेल्ट एक ही रंग के पहनें।
- सीधे और तनकर खड़े हों, ताकि आपमें आत्मविश्वास झलके।
- अपने दांतों को स्वस्थ्य रखें, ताकि मुंह से बदबू न आए। अगर बदबू आती हो, तो डाक्टर से मिलें, या माउथफ्रेशनर का इस्तेमाल करें।
- नाक और कान के बाल हमेशा काट कर रखें।
- नाखून साफ सुथरे रखें। अगर नेलपालिश लगानी ही है, तो हल्के रंग का इस्तेमाल करें।
- ऑफिस में बेहद हल्का मेकअप करें, और बीच ऑफिस में बैठकर तो कतई मेकअप ना करें।
- फिजूल की एसेसरीज़ ऑफिस में ना पहनें जैसे टैटू, खूब सारी मालाएं और चूड़ियां।
- अगर आपके शरीर से पसीने की बदबू आती है, तो डियोड्रेंड और बाडी स्प्रे का इस्तेमाल करें, लेकिन एक बार में इनका ज़्यादा प्रयोग ना करें, क्योंकि तेज़ सुगंध सामने वाले को नापसंद हो सकती है।
- हो सके तो अपने बाल शैम्पू से धोएं, ताकि वो स्वस्थ्य और चमकीले दिखें।
- माइस्चराइज़र क्रीम लगाएं, जिससे आपकी त्वचा रुखी और परतदार ना लगे।

➧ लोगों से डील (व्यव्हार) करने के तरीके
अक्सर होता यूँ है की जब भी आप लोगों की बात करते है तो सबकी विचार धाराये अलग अलग होती है। इसलिए जब भी बिज़नस की बात की जाती है तब हमे इस बात का ख्याल रखना चाहिये की बिज़नस आपके हाँथ में होना चाहिये। लोगों से डील करने के तरीके पर ध्यान देते है। सबसे आसन तरीका कभी किसी की आलोचना न करें, किसी की बुराई न करें और न ही किसी की शिकायत करनी चाहिये

जब भी आपसे पुछा जाये तो आप अपना नजरिया स्पष्ट और ईमानदारी से बताये। अगर आपको लगता है की कोई चीज़ नहीं होनी चाहिये तो उस समय किसी से झगडे नहीं बल्कि अपना पक्ष रखते हुए उन्हें सोचने पर जोर दे। क्यूंकि यह भी हो सकता है की आप अपना पक्ष रखते समय कुछ भूल गए हो, और आपका पक्ष कमजोर भी हो सकता है।

दूसरों की बातों में आप इंटरेस्ट ले क्यूंकि हो सकता है की वो आपके बिज़नस डेवलपमेंट का एक हिस्सा बन सकें। दूसरों से नेटवर्किंग करते रहें क्यूंकि यह बिज़नस का बहुत जरुरी हिस्सा है। लोगो से मिलते रहे, ड्रिंक्स डिनर आदि पर लोगों को बुलाये और निरंतर नेटवर्किंग करते रहें।

लोगों के साथ कुछ ऐसे विषय जो आप दोनों के बीच सामान्य हो मसलन आप लोगों के पसंद न पसनद, फिल्मे, म्यूजिक, गेम्स। आदि इससे आपको एक दुसरे को समझने का मौका मिलता है। लोगों का बर्थडे और सालगिरह याद रखें और उन्हें बधाई सन्देश भेजे। जब भी आप बात करें तो ऐसी बात करें की लोगों को उसमे इंटरेस्ट आये वो उन बातों का हिस्सा बन सकें। अधिकांश समय हम अपने बारे में बात करते है जिसमे लोगों को कम रूचि लेते है। दुसरे लोगों को एहमियत देना चाहिये, और यह काम पूरी निष्ठां से करनी चाहिये

➧ नौकरी पर क्या करें, क्या ना करें?
Reach On Time (समय पर पहुंचे) - यदि आप कुछ मिनट देर से पहुंचने वाले हों तो पहले बॉस को फोन करके सूचना दे दें।

ग्राहकों के सामने अपना धीरज ना खोएं - आप ग्राहकों के साथ बहस में अपना धीरज ना खोएं। यदि आपको गुस्सा आए तो कुछ समय के लिए शांत हो जाएं, दस तक गिनती गिनें और कुछ भी कहने से पहले पूरी तरह शांति की हालत में आ जाएं।

Never Argue (अपने बॉस और सहपाठियों के साथ बहस न करें) - यदि वे ग़लत हैं और आप सही हैं फिर भी बहस से बचे क्योंकि इससे आपको कोई मदद नहीं मिलेगी।

Positive (सकारात्मक) रवैया अपनाएं - बुरा बर्ताव करने वाले व्यक्ति के साथ कौन काम करना चाहेगा। आप अपनी निजी समस्या अपने घर तक रखें। जब आप काम पर हों तो पॉज़िटिव (सकारात्मक) बने रहें।

Ask Questions (सवाल करें) - नौकरी पर अपने काम को अच्छी तरह से समझ लें। जिस काम में शंका या संदेह हो, उसके बारे में अपने बॉस या सहपाठियों से तुरंत पूछें और उनके मार्गदर्शन पर अमल करें।

➧ कैसी है आपकी निर्णय क्षमता?
कहते हैं डि‍सीजन Marketing पावर अनुभव के साथ आती है परंतु वर्तमान में यह कहना गलत होगा क्योंकि कार्पोरेट वर्ल्ड में अलग-अलग स्तरों पर युवाओं से लेकर प्रौढ़ महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं।

कई कंपनियों में डी-सेंट्रलाइज्ड वर्क कल्चर होता है जिसमें कर्मचारी अपने स्तर पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहते हैं। निर्णय लेने के लिए परिस्थितियों का अध्ययन और निर्धारित समय के भीतर निर्णय लेने की कला को विकसित करना है।

एक छोटी सी कहानी है जिसके माध्यम से पता चलेगा कि निर्णय लेने में जरा सी चूक में आप क्या कर बैठते हैं। पति-पत्नी अपनी शादी की 40 वीं सालगिरह मना रहे थे। पति ने अपनी पत्नी को खूबसूरत लॉकेट दिया, जो उसने एक एंटिक शॉप से लिया था। पत्नी लॉकेट पाकर खूब खुश हुई और उसने जैसे ही लॉकेट को देखने के लिए पुरानी सी डिबिया को खोला तो उसमें से एक परी निकली।

परी ने दोनों से कहा कि मैं तुम दोनों के 40 वर्षों तक एक-दूसरे के प्रति समर्पण व प्रेम से अभिभूत हूं और दोनों की एक-एक विश पूर्ण करूंगी। पहली बारी पत्नी की थी। पत्नी ने कहा कि मैं अपने पति के साथ दुनिया घूमना चाहती हूं। परी ने तत्काल उनकी टेबल पर विश्वभ्रमण के लिए एअर टिकट और होटल की व्यवस्था वाले वाउचर आदि प्रस्तुत कर दिए।

अब बारी पति की थी। पति सोच में पड़ गया कि क्या मांगा जाए, उसने परी से कहा कि मैं अपनी पत्नी के साथ दुनिया तो घूमना चाहता हूं पर दिल की इच्छा यह है कि मैं युवा पत्नी के साथ जाना चाहता हूं। परी ने एक बारगी पति को देखा और कहा कि ठीक है तुम्हारी इच्छा पूर्ण कर देती हूँ। उसने पत्नी को 23 वर्ष का बना दिया।

पति खुश हुआ पर उसने स्वयं की स्थिति देखी तब परी ने उसे 90 वर्ष का बना दिया था। दोस्तों पति ने परिस्थितियों को सही तरीके से नहीं भांपा और ऐसे विश की मांग कर दी जिसका न कोई औचित्य था और न ही परी को यह बात समझ में आने वाली थी क्योंकि पति यह भूल गया कि परी ने पहले कहा था कि मैं तुम दोनों के 40 वर्षों के प्रेम समर्पण से अभिभूत हूं। उसने स्वयं का स्वार्थ देखा जबकि पत्नी ने दोनों के फायदे की बात कही। परिस्थितियों को समझें

दोस्तों निर्णय लेने के पूर्व आप किन परिस्थितियों में निर्णय ले रहे हैं वह काफी महत्वपूर्ण होती है। कार्पोरेट वर्ल्ड में भी आपको कंपनी व सभी की भलाई को लेकर निर्णय लेना होता है। आप केवल स्वयं की स्वार्थ सिद्धी के लिए अपने अनुसार निर्णय नहीं ले सकते।

➧ सफलता के लिए बॉडी लैंग्‍वेज पर ध्यान दें
सक्‍सेस केवल अच्‍छी नॉलेज रखने या स्‍कि‍ल्‍स पाने में नहीं है। आप तब तक सक्‍सेस नहीं पा सकते जब तक आपका खुद को एक्‍सप्रेस करने का तरीका सही नहीं है।

प्रोफेशनल लाइफ हो या पर्सनल लाइफ इंपॉर्टेंट यह नहीं है कि आप क्या कहते हैं, बल्कि यह ज्‍यादा इंपॉर्टेंट है कि आप उसे किस तरह कहते हैं? हमेशा मुस्कराते रहें। जो लोग अपने बारे में अच्छा सोचते हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज अक्सर बेहतर होती है।

सार्वजनि‍क जीवन जीने वालों के लि‍ए ही नहीं बल्‍कि‍ दफ्तर में काम करने वालों के लि‍ए भी 'एटि‍ट्यूड' बड़ी काम की चीज है। इसलि‍ए जब भी आप कि‍सी से बात करें तो बॉडी लैंग्‍वेज पर जरूर ध्‍यान दें।

Personality Development के लिए कुछ खास बातें 

- चाहे बॉस हो या कलीग हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें करें।
- खुली हथेलियां गंभीरता और ग्राह्यता को दर्शाती हैं।
- करीब रहकर बात करना यानी रुचि लेना और दूर होने का मतलब है बातचीत में ध्यान नहीं होना।
- आराम मुद्रा का मतलब है कि आप संवाद के लिए तैयार हैं।
- ऑफिस में हाथ बांधकर खड़ा नहीं होना चाहिए, यह विरोध का संकेत है।
- हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं।
- मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा है।
- ऑफिस में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपनी पर्सनालि‍टी की सीरि‍यसनेस खो देंगे।

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