February 28, 2018

हर रोज़ कोई अपना रूठ जाता है - शायरी


रोज कहते हो कल बात करेंगे,
कल हमारी आँखे ही ना खुली तो क्या करोगे। 
हर रोज़ कोई ख्वाब टूट जाता है,
हर रोज़ कोई अपना रूठ जाता है,
न जाने मेरी किस्मत में क्या है,
जिसे मैं याद करूँ वही मुझे भूल जाता है।
आंसू की बुँदे हैं या आँखों में नमी हैं,
न ऊपर आसमान हैं न निचे जमीन हैं,
ये कैसा मोड़ हैं जिंदगी का,
आपकी ही जरुरत हैं और आपकी ही कमी हैं।
आज हँसी देकर कल रुला न देना,
इतना मिस करके कल भुला न देना,
अपने इस प्यारे रिश्ते को याद रखना,
कही इन्हे यादो की तरह भुला न देना।
कदमो की दूरी से दिलों के फैसले नहीं बढ़ते,
दूर होने से दिल के एहसास नहीं मरते,
कुछ क़दमों का फैसला ही सही हमारे बीच लेकिन,
ऐसा कोई पल नहीं जब हम आपको याद नहीं करते। 
बहाना कोई न बनाओ तुम मुझसे खपा होने का,
तुम्हे चाहने के अलावा कोई और गुनाह नही है मेरा।
देखू कहीं भी बस तेरा अक्स नजर आता है,
देखू जब आईने में खुद को तो तू नजर आता है,
प्यार जिंदगी की इबादत है,
पर मेरी इबादत में तेरा प्यार नजर आता है। 
आँखों से सामने हर पल आपको पाया है,
अपने दिल में सिर्फ आपको बसाया है,
आपके बिना हम जिय तो जिय कैसे,
भला जान के बिना भी कोई जी पाया है। 
जादू है उसकी हर एक बात में,
याद बहुत आती है दिन और रात में,
कल जब देखा था मैंने सपना रात में,
तब भी उसका ही हाथ था मेरे हाथ में। 
जो कभी हो तेरे दिल में सवाल,
कितनी है मुझे ज़रुरत तेरी,
तो ज़रा अपनी सांस रोक कर,
साँसों की तालाब महसूस कर लेना। 
ना किसी से डरता हु और न किसी पे मरता हूँ,
बस एक तुम्ही हो जिससे मै बहुत प्यार करता हूँ।

No comments:

Post a Comment