January 25, 2018

आशा और निराशा का है पूरा खेल - Motivational Hindi Story


किसी भी तरह की जीत के लिए जरूरी है आशा। निराशा जहर का पर्याय है। निराशा जीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। उम्मीद के सहारे सबकुछ पाया जा सकता है। इसके विपरीत निराशा आपके पास जो भी है उसे भी खो देती है। निराशा से उबरने का साधन ही आशा है।

मन से उपजती है आशा और निराशा
किसी भी इंसान का सबसे अच्छा दोस्त वह स्वयं होता है। वहीं इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन भी वह स्वयं होता है। क्योंकि अगर हम ये मान लें कि हम हार गए तो वास्वत में हम हार जाते हैं।​ फिर हमें कोई नहीं जीता पाता। लेकिन अगर हम जीतने की ठान लें तो फिर कोई हमें हरा नहीं पाता है। दोनों ही स्थितियों के लिए कोई दूसरा जिम्मेदार नहीं होता है। जिम्मेदार होते हैं तो केवल और केवल हम स्वयं ही होते हैं। क्योेंकि मन जीते जीत है और मन के हारे हार है।

भंवरजाल में ना फंसे
किसी भी सफल इंसान की सफलता का मूलम़ंत्र होता है उसका उत्साह है। अगर आपमें उत्साह है तो आप किसी भी हद तक जा सकते हो। लेकिन अगर मन में निराशा है तो आप ठीक ढंग से खड़े भी नहीं हो पाते हो। अगर यकीन नहीं हो तो किसी भी कार्य को दोनों अंदाज से करके देख लिजिए। स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। किसी भी टास्क को शुरू करने में काफी जोर आता है। कई तरह की परेशानियां आती है। अगर आप उनसे घबराकर हताश हो गए तो आपके सारे रास्ते एक ही झटके मेें बंद हो जाएंगें। तमाम परेशानियों के बावजूद अगर आपने निराशा को पास भी नहीं फटकने दिया तो आप देखेंगे कि आपके सामने कई रास्ते खुल जाएंगे।

मन को हमेशा मजबूत रखें
जब जब आप पर निराशा का भाव हावी होने लगे आप अपने मन को मजबूत करें। मन को म​जबूत करने से अभिप्राय: है कि आप निराशा के भाव से बचने के लिए हमेशा सकारात्मक सोचें। सकारात्मक रहने से आप पाएंगे कि आपके पास हर समस्या का समाधान है। कोई भी ऐसी समस्या नहीं है जिसका आप समाधान नहीं कर पाएंगे। एक दो बार आपने समस्याओं का डटकर मुकाबला कर ​लिया तो आपके मन से डर निकल जाएगा और सफलता आपके कदम चूमेगी।

No comments:

Post a Comment